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अध्याय 10 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण विज्ञान कक्षा 12 || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 10 Electromagnetic Induction notes in Hindi
Unit – 4 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण तथा प्रत्यावर्ती धाराएँ
अध्याय 10 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction)
अध्याय 10 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण में हम किन विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे?
- चुम्बकीय फ्लक्स
- चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक एवं विमा
- विद्युत चुम्बकीय प्रेरण : प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा प्रेरित धारा
- लेंज का नियम
- भंवर धाराएं
- फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम
- चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन
- प्रेरित विद्युत वाहक बल
- प्रेरित धारा तथा प्रेरित आवेश
- एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में गतिशील ऋजु रेखीय चालक तार के सिरों के बीच उत्पन्न प्रेरित विद्युत वाहक बल
- फ्लेमिंग के दाएं हाथ का नियम
- लारेंज बल के आधार पर विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की व्याख्या : फैराडे के नियम की उत्पत्ति
- प्रेरित विद्युत वाहक बल की विमा एवं मात्रक, स्वप्रेरण, स्वप्रेरण गुणांक या स्वप्रेरकत्व (स्वप्रेरण गुणांक की विमा एवं मात्रक)
- अन्योंन प्रेरण
- समतल कुंडली का स्वप्रेरकत्व
- लम्बी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व
- कुंडली में संचित स्थितिज ऊर्जा
- स्वप्रेरित धारा के प्रभाव के कुछ उदाहरण
- प्रेरकों के श्रेणीक्रम तथा समान्तर क्रम संयोजन
- अन्योंन प्रेरण
- अन्योंन प्रेरकत्व पर क्रोड के पदार्थ का प्रभाव
- दो समाक्ष परिनालिकाओं के बीच अन्योंन प्रेरकत्व
- भंवर धाराएं।
अध्याय 10 विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से संबंधित सभी महत्वपूर्ण में Topic पर High Quality Notes in Hindi.
चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) :-
चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी तल से लम्बवत गुजरने वाली सम्पूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की संख्या को उस तल का चुम्बकीय फ्लक्स कहते हैं। इसे ϕ_B से प्रदर्शित करते हैं। अथवा एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B ⃗ तथा क्षेत्रफल सदिश A ⃗ के अदिश गुणन को क्षेत्रफल A से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स कहते हैं। यदि क्षेत्रफल अवयव dA के प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता B ⃗ है तथा क्षेत्रफल सदिश dA ⃗ के स्केलर गुणन के बराबर होता है। dϕ_B= B ⃗ .dA ⃗ ,समी(1) ϕ_B= ∮_A▒〖B ⃗ .dA ⃗ 〗= B ⃗ .A ⃗ ϕ_B= BAcosθ ,समी(2) विशेष स्थितियां(1) यदि हो θ=0° तो cos0^°=1 ϕ_B= BAcos0°= BA(1) ϕ_B= BA ,(अधिकतम) यदि चुम्बकीय क्षेत्र, तल के लम्बवत होता है, तब चुम्बकीय फ्लक्स का मान अधिकतम होता है। (2) यदि हो θ=90° तो cos90^°=0 ϕ_B= BAcos90°= BA(0) ϕ_B= 0 ,(न्यूनतम) यदि चुम्बकीय क्षेत्र, तल के समांतर होता है, तब चुम्बकीय फ्लक्स का मान न्यूनतम होता है।
चुम्बकीय फ्लक्स का मात्रक (Unit of Magnetic Flux)
〖∵ ϕ〗_B= B ⃗ .A ⃗ ϕ_B का मात्रक= B का मात्रक×A का मात्रक =(वेबर⁄(मीटर) )×मीटर^2 =वेबर अतः चुम्बकीय क्षेत्र का SI मात्रक वेबर होता है। न्यूटन मीटर एम्पियर 1 (वेबर=न्यूटन-मीटर)⁄एम्पियर 1 वेबर=10^8 मैक्सवेल (CGS)चुम्बकीय फ्लक्स की विमा (Dimension of Magnetic Flux)
〖∵ ϕ〗_B= B ⃗ .A ⃗ ∴ϕ_B का मात्रक= B का मात्रक×A का मात्रक =न्यूटन/(एम्पियर-मीटर)× मीटर^2 =(न्यूटन-मीटर)/एम्पियर ∴ϕ_(B ) का विमा=[MLT^(-2) ][L]/([A]) =[ML^2 T^(-2) A^(-1) ]विद्युत चुम्बकीय प्रेरण : फैराडे के प्रयोग (Electromagnetic Induction: Faraday’s Experiments) :-
वैज्ञानिक माइकल फैराडे तथा जोसेफ हेनरी ने धारामापी के साथ जुड़ी कुंडली के बंद परिपथ तथा दंड चुंबक की सहायता से अनेक प्रयोग किए। उन्होंने यह तथ्य प्रस्तुत किया कि किसी परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन से कुंडली में विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। अतः चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा विद्युत धारा की उत्पत्ति संभव है। फैराडे तथा हेनरी के प्रयोगों से यह प्रदर्शित होता है कि चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में विभिन्न विधियों परिवर्तन हो सकता है और सभी स्थितियों में कुण्डली में विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। Note : चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन 3 विधियों से किया जा सकता है।विद्युत चुम्बकीय प्रेरण : फैराडे के प्रयोग (Electromagnetic Induction: Faraday’s Experiments) :-
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण संबंधी प्रयोगों के आधार पर फैराडे ने दो निष्कर्ष प्राप्त किए, जिन्हें फैराडे के नियम कहते हैं।(1) फैराडे का प्रथम नियम (न्यूमेन का नियम) (Faraday’s First Law (Newman’s Law)) :-
जब किसी परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है तो परिपथ में एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। जिसके कारण परिपथ में एक प्रेरित धारा उत्पन्न हो जाती है। जिसका परिमाण चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक दर के बराबर होती है। इसे न्यूमेन का नियम भी कहते हैं। अर्थात e= -∆ϕ/∆t ,समी(1) ∵ ∆ϕ=ϕ_2-ϕ_1 , ∆t= t_2- t_1 ∴ e=(ϕ_2-ϕ_1)/(t_2- t_1 ) यदि कुंडली में फेरों की संख्या N हो तो समी(1) से — e= - N ∆ϕ/∆t ऋणात्मक चिन्ह प्रेरित विद्युत वाहक बल (e) की दिशा को प्रदर्शित करता है। अतः e का परिमाण — e= N ∆ϕ/∆t(2) फैराडे का द्वितीय नियम (लेंज का नियम) (Faraday’s Second Law (Lenz’s Law)) :-
किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल अथवा प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि यह उस कारण का विरोध करती है। जिससे यह स्वयं उत्पन्न होती है। इसे लेंज का नियम भी कहते हैं।चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन (Change in Magnetic Flux) :-
किसी कुण्डली के तल के क्षेत्रफल A तथा चुंबकीय क्षेत्र B के मध्य कोण θ हो तो उस कुण्डली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स — Φ=BAcosθ अतः चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन निम्न प्रकार से किया जा सकता है।(1) चुंबकीय क्षेत्र परिवर्तित करके (By Changing The Magnetic Field)
यदि A क्षेत्रफल वाली एक कुण्डली, चुंबकीय क्षेत्र B के लम्बवत रखी हो, तो उस कुण्डली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स Φ_1=BA होगा। यदि कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र से अचानक हटा लिया जाए तो उससे बद्ध चुंबकीय फ्लक्स Φ_2=0 हो जाएगा। तब चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन — ∆ϕ=ϕ_2-ϕ_1=BA cos90°-BA=0-BA=-B(2) कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाकर (By Rotating the Coil in a Magnetic Field)
यदि प्रारम्भ में कुण्डली चुंबकीय क्षेत्र में लम्बवत रखी गई हो तो उससे बद्ध चुंबकीय फ्लक्स Φ_1=BA होगा। यदि कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में 90° घुमा दिया जाए तब चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन — ∆ϕ=ϕ_2-ϕ_1=BA cos90°-BA=0-BA=-BA यदि कुण्डली को चुम्बकीय क्षेत्र में 180° तक घुमा दिया जाए तब चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन — ∆ϕ=ϕ_2-ϕ_1=BA cos180°-BA=-BA-BA=-2BA(3) चुंबकीय क्षेत्र में कुण्डली का क्षेत्रफल (By Changing the Area of the Coil in a Magnetic Field)
यदि कुण्डली को चुंबकीय क्षेत्र से बाहर खींचे या भीतर धकेलें, तो चुंबकीय क्षेत्र में उसका प्रभावी क्षेत्रफल बदल जाने के कारण कुण्डली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो जाता है।प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा विद्युत धारा (Induced Electromotive Force and Electric Current) :-
सन 1831 ईस्वी में फैराडे ने यह खोज की कि जब किसी चुंबक और कुंडली के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो चुम्बकीय फ्लक्स की संख्या में तेजी से परिवर्तन होता है। जिसके फलस्वरुप कुंडली में विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। जिसे प्रेरित विद्युत वाहक बल कहते हैं। यदि परिपथ बन्द है तो परिपथ में विद्युत एक धारा प्रवाहित होने लगती है, जिसे प्रेरित विद्युत धारा कहते हैं। जब तक चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता रहता है तब तक प्रेरित विद्युत धारा बहती रहती है।विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) :-
चुम्बकीय क्षेत्र के द्वारा विद्युत धारा उत्पन्न होती है। अतः चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा विद्युत धारा उत्पन्न होने/करने की घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं। अथवा जब किसी कुण्डली या चुम्बक के बीच सापेक्ष परिवर्तन होता है तो चुम्बक में से गुजरने वाले (परिपथ से बद्ध) चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है। जिससे परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। इस घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।लेंज का नियम व ऊर्जा संरक्षण (Lenz’s Law and Conservation of Energy) :-
सन 1834 में जर्मन वैज्ञानिक ने विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के कारण उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए एक नियम प्रस्तुत किया। जिसे लेंज का नियम कहते हैं। लेंज के नियम के अनुसार, “किसी विद्युत परिपथ में प्रेरित धारा की दिशा सदैव ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है, जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।” वास्तव में लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम होता है।लेंज के नियम की व्याख्या (Explanation of Lenz’s Law) :-
लेंज के नियम की पुष्टि फैराडे के प्रयोग से हो जाती है। (1) चुंबक व कुंडली के प्रयोग में, जब चुंबक के N ध्रुव को कुंडली के पास लाते हैं, तो कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि कुंडली का चुंबक के पास वाला तल उत्तरी ध्रुव की तरह कार्य करता है। अतः कुंडली का तल पास आते हुए चुंबक की गति का विरोध करती है। अतः कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा वामावर्त होती है। (2) जब चुंबक के न ध्रुव को कुंडली से दूर ले जाते हैं तो कुंडली में प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है, कि कुंडली का चुंबक के पास वाला तल दक्षिणी ध्रुव की तरह कार्य करता है और चुंबक को अपनी ओर आकर्षित करता है, अर्थात चुंबक के दूर जाने की गति का विरोध करता है। इसी तरह दक्षिणी ध्रुव के साथ होता है। अतः स्पष्ट होता है कि प्रत्येक स्थिति में चुंबक को गतिमान करने के लिए, गति का विरोध करने वाले बल के कारण कुछ कार्य करना पड़ता है। यही यांत्रिक कार्य विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है। अतः सिद्ध होता है कि लेंस का नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है।प्रेरित विद्युत वाहक बल, प्रेरित धारा तथा प्रेरित आवेश (Induced Electromotive Force, Induced Current and Induced Charge) :-
प्रेरित विद्युत वाहक बल e=-(N∆Φ_B)/∆t इसका परिमाण e=|-(N∆Φ_B)/∆t|=(N∆Φ_B)/∆t यदि परिपथ का प्रतिरोध R हो तो धारा — i=V/R=e/R=(N∆Φ_B)/R∆t यदि धारा में प्रवाहित आवेश q हो तो — q=i∆t q=(N∆Φ_B)/R∆t×∆t q=(N∆Φ_B)/R(1) प्रेरित विद्युत वाहक बल (Induced EMF)
यदि किसी कुंडली में फेरों की संख्या N, चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन ∆ϕ तथा समयांतराल ∆t हो, तो परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल — e= - N ∆ϕ/∆t जबकि विद्युत वाहक बल का परिमाण — e= N ∆ϕ/∆t(2) प्रेरित धारा (Induced Current)
यदि परिपथ बंद हो और इसका प्रतिरोध R हो, तो ओम के नियम से प्रेरित धारा — i=e/R=(N ∆ϕ/∆t)/R i=N∆ϕ/R∆t(3) प्रेरित आवेश (Induced Charge)
∆t समयांतराल में परिपथ में प्रेषित आवेश — q= i×∆t q= N∆ϕ/R∆t ×∆t q= N∆ϕ/Rभंवर धाराएं (Eddy Currents) :-
जब किसी चालक से बद्ध कर चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन किया जाता है, तो उस चालक में जल से उत्पन्न भंवर के समान चक्करदार धाराएं उत्पन्न होती हैं। जिन्हें भंवर धाराएं कहते हैं। इन्हें फोटो धारा भी कहा जाता है। अथवा वे प्रेरित विद्युत धाराएं जो किसी चालक में तब उत्पन्न होती हैं, जब उसे किसी बदलते हुए चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है या किसी चुंबकीय क्षेत्र में गति कराया जाता है, भंवर धाराएं कहलाती हैं।प्रेरण अथवा प्रेरकत्व (Induction) :-
एक कुंडली में फ्लक्स परिवर्तन के कारण, कुण्डली में विद्युत धारा उत्पन्न (प्रेरित) हो सकती है। इस घटना को प्रेरण अथवा प्रेरकत्व कहते हैं। प्रेरण एक अदिश राशि है। प्रेरण दो प्रकार का होता है। (1) स्वप्रेरण (2) अन्योन प्रेरण(1) स्वप्रेरण (Self-Induction) :-
[Student’s Class Notes = जब किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो उसके चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। जब कुंडली की धारा में परिवर्तन किया जाता है तो कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। अतः कुंडली मूल धारा के अतिरिक्त एक प्रेरित विद्युत धारा भी उत्पन्न होती है। अर्थात वह घटना जिसमें कुंडली में प्रवाहित धारा को परिवर्तित करने से उसी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है, स्वप्रेरण कहलाती है।] जब किसी कुंडली में प्रवाहित धारा के मान में परिवर्तन किया जाता है तो चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है और कुण्डली में अतिरिक्त प्रेरित धारा स्वयं उत्पन्न हो जाती है। इस घटना को स्वप्रेरण कहते हैं। जैसे – चॉक कुण्डली।स्वप्रेरण गुणांक अथवा स्वप्रेरकत्व (Self Induction Coefficient)
किसी कुण्डली से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स , परिपथ में प्रवाहित धारा I के अनुक्रमानुपाती होता है। माना किसी कुण्डली में I धारा प्रवाहित हो रही है। तब धारा I के कारण प्रत्येक फेरे से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स ϕ_B∝I ϕ_B= LI जहां L एक नियतांक है जिसे परिपथ का स्वप्रेरण गुणांक कहते हैं। L=ϕ_B/I यदि कुण्डली में फेरों की संख्या N हो तो, L=〖Nϕ〗_B/I LI= Nϕ_B ,समी(1) यदि N = 1 तथा I = 1 हो तो — L=ϕ_B अतः “किसी कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक (स्वप्रेरकत्व), उस चुम्बकीय फ्लक्स के आंकिक मान के बराबर होता है जो उस कुण्डली में एकांक धारा प्रवाहित करने पर उत्पन्न होता है।” चूंकि प्रेरित विद्युत वाहक बल, e= - N ∆ϕ/∆t = -∆(Nϕ_B )/∆t ,{∵ LI= Nϕ_B } = - L ∆I/∆t यदि ∆I/∆t = 1 हो तो, e= -1⇒ L= -e संख्यात्मक मान लेने पर अर्थात — L=|-e|= e अतः किसी कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक अथवा स्वप्रेरकत्व, उस कुंडली के विद्युत वाहक बल बल के संख्यात्मक मान के बराबर होता है जो उस कुण्डली में धारा परिवर्तन की दर, एकांक होने पर उत्पन्न होता है। अथवा स्वप्रेरण गुणांक अथवा स्वप्रेरकत्व, किसी कुण्डली में एकांक धारा परिवर्तन की दर होने पर उत्पन्न वैद्धुत वाहक बल के संख्यात्मक मान के बराबर होता है।स्वप्रेरण गुणांक का मात्रक (Unit of Self Induction Coefficient)
स्वप्रेरण गुणांक का SI मात्रक हेनरी होता है।स्वप्रेरण गुणांक की विमा (Dimension of Self Induction Coefficient)
अन्योंन प्रेरण गुणांक की विमा=[ML^2 T^(-2) A^(-2) ]हेनरी की परिभाषा (Definition of Henry)
यदि किसी कुंडली में 1 एम्पियर/सेकेंड की दर से विद्युत धारा के परिवर्तित होने पर उस कुण्डली में 1 वोल्ट का विद्युत वाहक बल उत्पन्न (प्रेरित) हो, तो उस कुण्डली का स्वप्रेरण गुणांक 1 हेनरी होता है। 1 हेनरी=(1 वोल्ट)/(1 एम्पियर⁄सेकेंड) 1 mH=10^(-3) H 1 μH=10^(-6) Hलम्बी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance of a Long Solenoid) :-
माना एक लम्बी परिनालिका जिसकी L है तथा परच्छेद क्षेत्रफल A है। उसमें फेरों की संख्या N है। तब एकांक लंबाई में फेरों की संख्या n=N/l यदि धारा i हो तो परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र — B=(μ_0 Ni)/l ,eq(1) तथा चुम्बकीय फ्लक्स ϕ_B= BA= ϕ_B=(μ_0 Ni)/l×N,μ_0 (N/l)iA Nϕ_B=μ_0 niA जहां n=N/l ,eq(3) अतः स्वप्रेरकत्व L=(Nϕ_B)/i L=N/i (μ_0 niA ) = μ_0 nNA =μ_0 (N.N.A)/l=(μ_0 N^2 A)/lलम्बी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व (Self-Inductance of a Long Solenoid) :-
प्रेरकों का श्रेणीक्रम संयोजन ( Series Combination of Inductors)
यदि दो कुंडली जिनके प्रेरकत्व L_1 व L_2 हैं। जो आपस में श्रेणी क्रम में जुड़े हो, तो उनमें समान धरा i उत्पन्न होगी। तब कुंडलियों से बद्ध कुल विद्युत फ्लक्स — ϕ_B=L_1 i+L_2 i,eq(1) यदि तुल्य प्रेरकत्व L हो तो — ϕ_B= Li ,eq(2) समी (1) व (2) से Li=L_1 i+L_2 i Li=i(L_1+L_2 ) L=L_1+L_2प्रेरकों का समांतर क्रम संयोजन (Parallel Combination of Inductors)
यदि दोनों कुंडलियां समांतर क्रम में जुड़ी हो तो प्रेरित धारा — i=i_1+i_2 ∆i/∆t=(∆i_1)/∆t+(∆i_2)/∆t e/L=e/L_1 +e/L_2 e/L=(eL_2+eL_1)/(L_1 L_2 ) e/L=e((L_1+L_2)/(L_1 L_2 )) 1/L=(L_1+L_2)/(L_1L_2 ) व्युत्क्रम करने पर — L=(L_1 L_2)/(L_1+L_2 )अन्योंन प्रेरण (Mutual-Induction) :-
यदि हम दो कुंडलियों को पास पास रखकर उनमें से एक में बैटरी द्वारा विद्युत धारा प्रवाहित करें अथवा उनमें प्रभावित होने वाली विद्युत धारा के मान में परिवर्तन करें तो दूसरी कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है। विद्युत चुंबकीय प्रेरण की यह घटना अन्योन प्रेरण कहलाती है। पहली कुंडली को प्राथमिक कुंडली तथा दूसरी कुंडली को द्वितीय कुंडली कहते हैं।अन्योंन प्रेरण गुणांक अथवा अन्योंन प्रेरकत्व (Coefficient of Induction)
जब किसी कुंडली में एकांक धारा परिवर्तन की दर हो तो कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल के तुल्य प्रेरण को अन्योंन प्रेरण गुणांक कहते हैं। परस्पर समीप रखी हुई दो कुंडलियों के बीच अन्योन प्रेरण गुणांक द्वितीय कुंडली में फ्लक्स ग्रंथियों की कुल संख्या के बराबर होता है, जबकि प्राथमिक कुंडली में एकांत धारा प्रवाहित हो रही हो। N_2 ϕ_2∝i_1 N_2 ϕ_2=Mi_1 M=(Mi_1)/(N_2 ϕ_2 ) जहां M अन्योंन प्रेरण गुणांक है।अन्योंन प्रेरण गुणांक का मात्रक (Unit of Mutual Induction Coefficient)
अन्योंन प्रेरण गुणांक का मात्रक हेनरी होता है।अन्योंन प्रेरण गुणांक की विमा (Dimension of Mutual Induction Coefficient)
अन्योंन प्रेरण गुणांक की विमा=[ML^2 T^(-2) A^(-2) ]Please Inform any Error.
10. Electromagnetic Induction: Complete Notes.
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