21 प्रकाश का ध्रुवण || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 21 notes in Hindi
21 प्रकाश का ध्रुवण || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 21 notes in Hindi
21 प्रकाश का ध्रुवण || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 21 notes in Hindi
21 Chapter Physics Theory class 12th
ध्रुवित तथा अध्रुवित प्रकाश :– बी
साधारण प्रकाश में विद्युत वेक्टर के कंपन तरंग संचरण की दिशा के लंबवत सभी दिशाओं में सममित रूप से होते हैं। अतः साधारण प्रकाश अध्रुवित प्रकाश होता है।
यदि किसी युक्ति द्वारा साधारण प्रकाश के विद्युत वेक्टर के कंपन एक ही दिशा में सीमित कर दिए जाएं तो इस प्रकार प्राप्त प्रकाश को ध्रुवित प्रकाश कहते हैं तथा इस घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं।
जैसे जब साधारण प्रकाश को टूरमैलीन या पोलेरॉयड से होकर गुजारा जाता है तो प्राप्त प्रकाश ध्रुवित प्रकाश होता है।
प्रकाश तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति :–
प्रकाश तरंगों के अनुप्रस्थ होने की पुष्टि निम्नलिखित प्रयोग द्वारा की जा सकती है। माना कि गत्ते के दो टुकड़ों में रेखा छिद्र S1 व S2 काटे गए हैं। माना की एक रस्सी S1 व S2 में से गुजारी जाती है तथा रस्सी के S1 के पास वाले सिरे को S1 की लंबाई के समांतर अनुप्रस्थ कंपन उत्पन्न किए जाते हैं। यदि रेखा क्षेत्र S2 की लंबाई S1 के समांतर होती है, तो ये कंपन S2 में से ज्यों के त्यों गुजर जाते हैं। अब यदि S2 को अपने ही तल में धीरे-धीरे घुमाया जाए तो S2 में से निकलने वाले कम्पनों का आयाम क्रमशः घटता जाता है और जब s2 की लंबाई, S1 के लंबवत हो जाती है तो S2 में से कंपन बाहर नहीं आते अर्थात निर्गत कंपन का आयाम शून्य हो जाता है। अब यदि S2 को और घुमाएं तो S2 से निकलने वाले कम्पनों का आयाम पुनः बढ़ने लगता है। जब S2 पुनः S1 के समांतर हो जाता है तो S2 से निकलने वाले कंपन पुनः ठीक पहले जैसे निकलने लगते हैं।
यदि हम रस्सी में अनुदैर्ध्य तरंग उत्पन्न करें अर्थात रस्सी को उसकी लंबाई के अनुदिश बार-बार खींचे और ढीली छोड़ दें तो हम देखते हैं कि छिद्रों S1 S2 की स्थितियों का तरंग पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। रेखाचित्र S1 के सापेक्ष S2 को किसी भी स्थिति में घुमाएं, अनुदैर्ध्य तरंग के कंपन सदैव ही रखा क्षेत्र h2 में से गुजर जाएंगे।
इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि यदि S1 व S2 में से एक रस्सी को गुजरकर S1 के पास वाले सिरे को कंपन देने से S2 को घुमाने पर कंपन के आयाम में परिवर्तन होता है। अतः S1 में से गुजरने वाले कंपन अनुप्रस्थ होते हैं।
टूरमैलीन प्रयोग :–
टूरमैलीन प्रयोग में दो क्रिस्टल A और B को इस प्रकार काटते हैं कि अक्षे उनके धरातल में हों। प्राकृतिक प्रकाश की किरणें एक क्रिस्टल A पर अभिलंबवत डालते हैं तो इससे गुजरने वाला प्रकाश कुछ हरे रंग का दिखाई पड़ता है। अब यदि क्रिस्टल A को किरण के परित घुमाया जाए, तो इससे निकलने वाले प्रकाश की तीव्रता में कोई अंतर नहीं होता है। इससे स्पष्ट होता है कि लंबवत तल में प्रकाश के कंपन सभी दिशाओं में हो रहे हैं।
यदि क्रिस्टल A और आंख के बीच एक अन्य क्रिस्टल B इस प्रकार रख दिया जाए कि दोनों क्रिस्टलों की अक्षे परस्पर समांतर हों। क्रिस्टल A को स्थिर रखते हुए यदि क्रिस्टल B को उसके ही तल में धीरे-धीरे घुमाएं तो आंख में पहुंचने वाले प्रकाश की तीव्रता कम होने लगती है। जब दोनों क्रिस्टलों की अक्षे एक दूसरे के अभिलंबत हो जाती हैं तो निर्गत प्रकाश की तीव्रता न्यूनतम हो जाती है अर्थात लगभग अंधेरा हो जाता है। इस प्रयोग से स्पष्ट है कि प्रकाश की तरंगों में अनुप्रस्थ कंपन होते हैं।
यदि प्रकाश की तरंगों में अनुधैर्य कंपन होते तो B से निकलने वाले प्रकाश की तीव्रता सदैव एक जैसी होती और प्रकाश की तीव्रता पर एक क्रिस्टल को घुमाने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस प्रयोग में प्रत्येक टूरमैलीन क्रिस्टल एक रेखा छिद्र की भांति व्यवहार करता है और प्रकाश की तरंग रस्सी की भांति व्यवहार करती है।
टूरमैलीन प्रयोग की व्याख्या :–
सामान्य प्रकाश की तरंग में विद्युत वेक्टर के कंपन तरंग संचरण की दिशा के लंबवत तल में प्रत्येक दिशा में सममित रूप से होते हैं। जब कोई प्रकाश तरंग किसी टूरमैलीन क्रिस्टल पर डाली जाती है तो प्रकाश तरंग के केवल वही कंपन बाहर निकाल पाते हैं जो क्रिस्टल की अक्ष के समांतर होते हैं। शेष कंपन क्रिस्टल द्वारा रोक दिए जाते हैं। इस स्थिति में क्रिस्टल से निकलने के पश्चात प्रकाश तरंग के कंपन तरंग की गति के लंबवत तल में केवल एक ही दिशा में होते हैं। ऐसी तरंग को समतल ध्रुवित तरंग कहते हैं और इस घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं।
टूरमैलीन प्रयोग में पहला टूरमैलीन क्रिस्टल A से निकलने वाला ध्रुवित प्रकाश दूसरे क्रिस्टल B पर पड़ता है। जब दोनों क्रिस्टलों की अच्छे परस्पर समांतर होती हैं तो पहले क्रिस्टल से निकलने वाले कंपन दूसरे क्रिस्टल B से भी निकल जाते हैं और निर्गत प्रकाश की तीव्रता अधिकतम होती है। परंतु जब दोनों क्रिस्टलों की अक्षे परस्पर लंबवत होती हैं तो पहले क्रिस्टल से निकलने वाले कंपन दूसरे क्रिस्टल द्वारा रोक दिए जाते हैं और निर्गत प्रकाश की तीव्रता शून्य हो जाती है।
इस अवस्था में दोनों क्रिस्टल परस्पर क्रासित कहलाते हैं। मध्य की किसी अवस्था के लिए पहले क्रिस्टल से निकलने वाले कंपन के केवल वही घटक निकाल पाते हैं जो दूसरे क्रिस्टल की अक्ष के समांतर होते हैं। इस प्रकार निर्गत प्रकाश की तीव्रता दोनों क्रिस्टलों की अक्षों के झुकाव कोण पर निर्भर करती है। टूरमैलीन के पहले क्रिस्टल A को जो प्रकाश की तरंगों को ध्रुवित करता है, ध्रुवक कहलाता है तथा दूसरा क्रिस्टल यह परीक्षण करता है कि पहले क्रिस्टल से निकलने वाला प्रकाश ध्रुवित है या नहीं है। अतः यह विश्लेषक कहलाता है।
ध्रुवित प्रकाश का कम्पन तल और ध्रुवण तल :–
समतल ध्रुवित प्रकाश में स्थित वह तल जिसमें प्रकाश के विद्युत वेक्टर के कम्पनों की दिशा तथा प्रकाश तरंग के संरक्षण की दिशा दोनों ही निहित होते हैं, कम्पन तल कहलाता है।
वह तल जो कम्पन तल के लंबवत हो तथा जिसमें प्रकाश तरंग के संरक्षण की दिशा निहित होती है ध्रुवण तल कहलाता है। ध्रुवण तल में प्रकाश के कोई कम्पन नहीं होते हैं।
समतल ध्रुवित प्रकाश का उत्पादन : विधियां
समतल ध्रुवित प्रकाश उत्पन्न करने की निम्नलिखित मुख्य विधियां होती हैं।
अपवर्तन द्वारा प्रकाश का ध्रुवण
द्वि अपवर्तन द्वारा प्रकाश का ध्रुवण द्विवर्णता द्वारा प्रकाश का ध्रुव पोलराॅयड द्वारा प्रकाश का ध्रुव
पोलराइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता : मैलस का नियम
सन 1809 ईस्वी में वैज्ञानिक मैलस ने पोलराइड पर आपके प्रकाश व निर्गत प्रकाश की तीव्रताओं के मध्य पारस्परिक संबंध में एक नियम प्रस्तुत किया जिसे मैलस का नियम कहते हैं।
इस नियम के अनुसार यदि किसी पोलराइड पर आपतित प्रकाश की तीव्रता I_0 हो तो पहले पोलराइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता I_1=I_0 cos^2θ होती है। यही मैलस का नियम है।
उत्पत्ति निगमन :– माना किसी पोलराइड पर आपतित प्रकाश की तीव्रता I_0 तथा इसके विद्युत वेक्टर के कम्पन का आयाम a है। तो –
I_1=I_0 cos^2θ,eq(1)
I_0=ka^2 ,eq(2)
माना पोलराइड की ध्रुवण दिशा तथा आपतित प्रकाश के विद्युत वेक्टर के आयाम की दिशा के बीच कोण θ है। तो आयाम को परस्पर लम्बवत दो घटकों में वियोजित करने पर –
पोलराइड की ध्रुवण दिशा के समांतर घटक =acosθ
पोलराइड की ध्रुवण दिशा के लम्बवत घटक =asinθ
∵ पोलराइड से केवल घटक acosθ ही गुजर सकता है।
अतः पोलराइड से निर्गत प्रकाश की तीव्रता –
I_1=k(acosθ)^2
I_1=ka^2 cos^2θ ,eq(3)
समी (2) से I_0=ka^2 समी (3) में रखने पर –
I_1=I_0 cos^2θ
यही मैलस का नियम है।
विशेष स्थितियां —
(i) यदि पोलराइड पर आपतित प्रकाश ध्रुवित है तो विद्युत वेक्टर के कम्पन सभी दिशाओं में होंगे।
I_1=I_0 cos^2〖90°〗
I_1=I_0 (1/√2)^2
I_1=1/2 I_0
अतः किसी पोलराइड (ध्रुवण) से निर्गत प्रकाश की तीव्रता इस पर आपतित प्रकाश की तीव्रता की आधी होती है।
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