24 नाभिक की सरंचना || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 24 notes in Hindi

 24 नाभिक की सरंचना || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 24 notes in Hindi

 24 नाभिक की सरंचना || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 24 notes in Hindi


24 Chapter Physics Theory class 12th नाभिक

नाभिक :–

रदरफोर्ड ने अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला की परमाणु का समस्त धनावेश तथा द्रव्यमान परमाणु के केंद्रीय भाग में बहुत कम आयतन में (लगभग 10^(-10) मी को के सूक्ष्म स्थान में) निहित रहता है जिसे नाभिक कहते हैं। नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉन परिक्रमण करते रहते हैं। इलेक्ट्रॉन का कुल ऋण आवेश नाभिक के कुल धन आवेश के बराबर होता है। अतः सामान्य अवस्था में परमाणु पूर्ण रूप से विद्युत उदासीन होता है।

परमाणु द्रव्यमान मात्रक (amu) :–

एक परमाणु द्रव्यमान मात्रक कार्बन 6C12 के द्रव्यमान के 12वें भाग के बराबर होता है। इसे u या amu से प्रदर्शित करते हैं।

1 amu=1/N

=1/(6.02×10^(-23) ) g

=1.66×10^(-24) g

=1.66×10^(-27) kg

प्रोटॉन की खोज :–

रदरफोर्ड ने 1919 में एक सिलेंडर में हल्के दाब पर भारी नाइट्रोजन गैस से रेडियोएक्टिव पदार्थ से उत्सर्जित अल्फा कणों को गुजारा तब सिलेंडर के दूसरे सिरे पर लगी चांदी की पतली पानी से बाहर रखे जिंक सल्फाइड के पर्दे पर्दे पर छोटे-छोटे प्रश्न पूर्व प्रकाश बिंदु प्राप्त हुए जो अल्फा कणों के कारण उत्पन्न नहीं हो सकते क्योंकि अल्फा कार्ड चांदी की पतली पानी को पर नहीं कर सकते हैं यह एक नए प्रकार के कान होते हैं जिन पर इलेक्ट्रॉन के बराबर धन आवेश तथा द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के नाभिक के बराबर होता है इन कणों को प्रोटॉन कहा गया इन्हें 1h1 से प्रदर्शित करते हैं।

न्यूट्रॉन की खोज इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन की खोज के पश्चात भी परमाणु के नाभिक की संरचना के विषय में अनेक प्रश्नों का उत्तर नहीं मिला था सन 1932 ईस्वी में जेम्स चैडविक ने देखा कि बेरिलियम नाविक पर अल्फा कणों की बौछार की जाती है तो उसमें से कुछ

नाभिकों का वर्गीकरण

समस्थानिक अथवा समप्रोटॉनिक :–

किसी एक ही तत्व के ऐसे विभिन्न परमाणु जिनके नाभिकों में प्रोटॉन की संख्या समान होती है परंतु न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न-भिन्न होती है समस्थानिक या समप्रोटॉनिक कहलाते हैं।

दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि किसी तत्व के विभिन्न समस्थानिकों के परमाणु क्रमांक समान होते हैं परंतु द्रव्यमान संख्या भिन्न-भिन्न होती है।

जैसे –

हाइड्रोजन

ऑक्सीजन

क्लोरीन

समभारिक :– किसी भी तत्व के ऐसे नाभिक जिसमें न्यूक्लिआनों की कुल संख्या (द्रव्यमान संख्या) समान होती है परंतु प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न-भिन्न होती है समभारिक कहलाते हैं। जैसे –

समन्यूट्रॉनिक :–

ऐसे नाभिक जिनमें केवल न्यूट्रॉनों की संख्या समान होती है, समन्यूट्रॉनिक कहलाते हैं।

 नाभिकीय बल नाभिक के भीतर न्यूट्रॉन को न्यूट्रॉन से प्रोटॉन को प्रोटॉन से तथा न्यूट्रॉन को न्यूट्रॉन से बांधे रखने वाले बाल को नाभिकीय बल कहते हैं।

नाभिकीय बल की विशेषताएं

नाभिकीय बल्कि निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं

नाभिकीय बल आकर्षण बल होते हैं।

नाभिकीय बल अविद्युत बल होते हैं।

नाभिकीय बल अगुरुत्वीय बल होते हैं।

नाभिकीय बल अत्यंत प्रबल बल होते हैं।

नाभिकीय बल अत्यंत लघु परासी होते हैं।

रेडियोधर्मिता

प्रतिदीप्त और स्फुरदीप्त पदार्थ :–

कुछ पदार्थ पर जब उच्च आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है तो वह उसे अवशोषित करके कम आवृत्ति के प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं। यदि पदार्थ केवल तब तक उत्सर्जन करें जब तक की उन पर प्रकाश डाला जाता है तो यह पदार्थ प्रतिदीप्त पदार्थ कहलाते हैं तथा पदार्थ का यह गुण प्रतिदीप्ति कहलाता है।

परंतु यदि पदार्थों पर प्रकाश डालना बंद करने के बाद भी वे कुछ समय तक प्रकाश उत्सर्जित करते हैं तो वे पदार्थ इस स्फुरदीप्त पदार्थ कहलाते हैं तथा उनका यह है गुण इस स्फुरदीप्ति कहलाता है।

Note:– कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जो स्वतः ही विकिरण उत्सर्जित करते हैं। इनका अध्ययन हेनरी बेकुरल ने किया था।

सन 1896में फ्रांस फ्रांस के वैज्ञानिक फ्रांस के वैज्ञानिक बेकुरल ने देखा कि यूरेनियम तथा इसके लवणों से कुछ अदृश्य करने सोता ही निकलते हैं जो अपारदर्शी पदार्थ में प्रवेश करने की क्षमता रखती हैं तथा फोटोग्राफी प्लेट पर प्रभाव डालते हैं इन कॉमन को रेडियोएक्टिव करने या बेकार करने कहते हैं

किसी पदार्थ से स्वतः ही किरण उत्सर्जित होते रहने की घटना को रेडियोएक्टीवता या रेडियोधर्मिता कहते हैं तथा ऐसे पदार्थ को रेडियोएक्टिव पदार्थ कहते हैं।


टिप्पणियाँ

Popular Posts

2 मात्रक मापन तथा त्रुटि विश्लेषण | नोट्स | Kumar Mittal Physics class 11th chapter 2 notes in Hindi

8 धारा-लूप पर बल-युग्म का आघूर्ण : चल कुण्डली धारामापी || हिंदी नोट्स || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 8 notes in Hindi