अध्याय 12 विद्युत चुम्बकीय तरंगें भौतिक विज्ञान कक्षा 12 || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 12 Electromagnetic Waves notes in Hindi

अध्याय 12 विद्युत चुम्बकीय तरंगें भौतिक विज्ञान कक्षा 12 || Kumar Mittal Physics class 12 chapter 12 Electromagnetic Waves notes in Hindi


Unit – 3 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव तथा चुम्बकत्व

विद्युत चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)


विद्युत चुम्बकीय तरंगें में हम किन विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे?

  • विस्थापन धारा
  • विस्थापन धारा की आवश्यकता
  • मैक्सवेल का प्रकाश के सम्बन्ध में विद्युत चुम्बकीय तरंग सिद्धांत
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगे तथा उनके अभिलक्षण 
  • मुक्त आकाश में E तथा B के परिणामों के बीच सम्बन्ध
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों में ऊर्जा घनत्व
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों के अभिलक्षण
  • विद्युत चुम्बकीय तरंगों की अनुप्रस्थ प्रकृति
  • विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम।

अध्याय 12 विद्युत चुम्बकीय तरंगें से संबंधित सभी महत्वपूर्ण में Topic पर High Quality Notes in Hindi.


विद्युत चुंबकीय तरंगें (Electromagnetic Waves)

वैज्ञानिक मैक्सवेल ने 1865 में गणितीय सूत्रों के आधार पर यह प्रमाणित किया कि “जब कभी किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा बहुत उच्च आवृत्ति से बदलती है अर्थात परिपथ में उच्च आवृत्ति के दोलन होते हैं, तो उस परिपथ से ऊर्जा, तरंगों के रुप में चारो ओर प्रसारित होने लगती है। इन तरंगों को विद्युत चुंबकीय तरंगें कहते हैं।”

दूसरे शब्दों में, “जिन तरंगों में विद्युत क्षेत्र एवं चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे के अभिलम्बवत कंपन या गति करते हैं। उन तरंगों को विद्युत चुंबकीय तरंगें कहते हैं।” ये अनुप्रस्थ प्रकृति की तरंगे होती हैं तथा निर्वात में प्रकाश की चाल से चलती हैं।

इनकी खोज सर्वप्रथम मैक्सवेल ने 1865 ईस्वी में की थी। यह अनुप्रस्थ प्रकृति की तरंगे होती हैं तथा निर्वात में प्रकाश की चाल से चलती हैं।

विद्युत चुंबकीय तरंगों के स्रोत (Sources of Electromagnetic Waves)

विद्युत चुंबकीय तरंगे परिवर्ती विद्युत क्षेत्र तथा परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र के एक दूसरे पर अभिलम्बवत होने से उत्पन्न होती हैं तथा तरंग संचरण की दिशा इन दोनों क्षेत्रों के भी अभिलम्बवत होती है।

विद्युत चुंबकीय तरंगों की उत्पत्ति : हर्टज का प्रयोग (Generation of Electromagnetic Waves: Hertz’s Experiment)

वैज्ञानिक हर्टज ने धातु की दो प्लेटें ली और प्लेटों को दो तारों से जोड़ दिया तथा तारों के सिरों पर धातु की दो गोलियां लगा दी। इसके पश्चात दोनों प्लेटों को एक प्रेरण कुंडली (द्वितीयक) से संबंधित कर दिया। जिससे प्लेटों पर उच्च विभव उत्पन्न होगा। उच्च विभव के कारण प्लेटों पर आवेश भी उच्च होगा। S1 व S2 के बीच सूक्ष्म रिक्त स्थान (वायु) होने के कारण धारा सीधे-सीधे दूसरी प्लेट तक प्रवाहित नहीं होगी बल्कि विसर्जित होगी। अर्थात एक चिंगारी उत्पन्न होगी जो तरंग के रूप में होगी। गोलियों से कुछ दूरी पर लगे एक संसूचक के द्वारा इन्हें डिटेक्ट (पहचान) कर लिया जाता है।

अतः इससे जो तरंगें निकलती है। वह विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं। प्रयोग में पाया गया कि इनकी तरंगदैर्य लगभग 6 मीटर होती है। विद्युत चुंबकीय तरंगे उत्पन्न करने का यह तरीका केवल प्रयोगशाला तक सीमित था। यह प्रयोग मैक्सवेल के सिद्धांत पर आधारित था। जिस पर सर्वप्रथम हर्टज ने प्रयोग किया।

इसके बाद भारत के वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु ने अति सूक्ष्म विद्युत चुंबकीय तरंगों का निर्माण किया था। यह तरीका भी प्रयोगशाला तक सीमित था। बाद में मारकोनी ने विद्युत चुंबकीय तरंगों का निर्माण किया, जो काफी दूर पर प्राप्त की गई। इसी के आधार पर हमारे संचार सेवा की शुरुआत हुई अर्थात इन्हीं तरंगों का उपयोग हमारे संचार सेवा (communication) में होता है।

आवेश से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts Related to Charges)

  1. स्थिर आवेश — केवल विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है।
  2. एक समान वेग से गतिमान आवेश — विद्युत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। 
  3. त्वरित आवेश — परवर्ती विद्युत क्षेत्र तथा परवर्ती चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। ये विद्युत चुंबकीय तरंगे उत्पन्न करते हैं। 
  4. किसी आवेश के दोलन से — परवर्ती विद्युत क्षेत्र तथा परवर्ती चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होते हैं। ये विद्युत चुंबकीय तरंगे उत्पन्न करते हैं।

विद्युत चुंबकीय तरंगों के गुण (Properties of Electromagnetic Waves)

  1. ये तरंगे दोलनमय या त्वरित आवेशित कणों (आवेशों) से उत्पन्न होती हैं।
  2. ये तरंगे अनुप्रस्थ तरंगे होती हैं। 
  3. इन तरंगों को चलने के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
  4. निर्वात में विद्युत चुंबकीय तरंगों का वेग, प्रकाश के वेग के बराबर होता है। 
  5. इन तरंगों में अपवर्तन, परावर्तन, व्यतिकरण, विवर्तन, ध्रुवण आदि घटनाएं होती हैं अर्थात ये तरंगे अपवर्तन, परावर्तन, व्यतिकरण तथा विवर्तन का गुण प्रदर्शित करती हैं। 
  6. निर्वात में विद्युत चुंबकीय तरंगों के पथ के किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र का अनुपात, प्रकाश के वेग के बराबर होता है अर्थात |E ⃗ |/|B ⃗ | = c 
  7. विद्युत चुंबकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र एवं चुंबकीय क्षेत्र सदिश समान कला में होते हैं, परंतु परस्पर लंबवत दोलन करते हैं। 
  8.  E ⃗ व B ⃗ परस्पर लंबवत व तरंग संचरण के भी लंबवत होते हैं। 
  9. इनकी ऊर्जा विद्युत तथा चुंबकीय क्षेत्रों में विभाजित होती है। 
  10. विद्युत चुंबकीय तरंगों में संवेग होता है। इसी कारण ये आपतित पृष्ठ पर विकिरण दाब डालती हैं। 
  11. विद्युत चुंबकीय तरंगों की अन्योन क्रिया अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार होती है। 
  12. इस तरंगों के स्पेक्ट्रम में तरंगधैर्य परास का मान शून्य से अनंत तक होता है। 
  13. ये तरंगे अपने साथ ऊर्जा का स्थानांतरण करती हैं। यह ऊर्जा विद्युत तथा चुंबकीय दोनों क्षेत्रों में निहित होती है। विद्युत क्षेत्र में ऊर्जा घनत्व U_E=1/2 ϵ_0 E^2 व चुंबकीय क्षेत्र में ऊर्जा घनत्व U_B=1/2 B^2/μ_0 तथा औसत ऊर्जा घनत्व U_avr= U_E+ U_B होता है।

विस्थापन धारा (Displacement Current)

वह विद्युत धारा जो समय के साथ विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होती है, उसे विस्थापन धारा कहते हैं। इसे $i_d$ से प्रदर्शित करते हैं।

i_d=ϵ_0 (∆ϕ_E)/∆t

विस्थापन धारा के लिए व्यंजक (Expression for Displacement Current)

माना किसी संधारित्र की प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A तथा किसी क्षण उस पर आवेश q है, तो संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र —

E=σ/ϵ_0 ,समी(1) जहां पृष्ठ ही आवेश घनत्व σ=q/A ∴E=σ/(Aϵ_0 ) q= EA ϵ_0 q=ϕ_E ϵ_0 ,समी(2) यहां ϕ_E संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच विद्युत फ्लक्स है। अतः संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच बहने वाली विस्थापन धारा — i_d=dq/dt=d/dt (ϵ_0 ϕ_E ) i_d=ϵ_0 (dϕ_E)/dt यही विस्थापन धारा का अभीष्ट व्यंजक है।

मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय तरंग सिद्धान्त की व्याख्या (Explaining Maxwell’s Theory of Electromagnetic Waves)

मैक्सवेल ने सन 1865 में केवल गणितीय सूत्रों के आधार पर यह प्रमाणित किया कि जब कभी किसी विद्युत परिपथ में विद्युत धारा बहुत उच्च आवृत्ति से बदलती है, अर्थात उच्च आवृत्ति के दोलन होते हैं, तो उस परिपथ से ऊर्जा तरंगों के रूप में चारों ओर को प्रसारित होने लगती है। इन तरंगों को विद्युत चुंबकीय तरंगे कहते हैं। इन तरंगों में विद्युत क्षेत्र तथा चुंबकीय क्षेत्र परस्पर लंबवत होते हैं तथा तरंग संचरण की दिशा से भी लंबवत होते हैं।

इन तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात विद्युत चुंबकीय तरंगे निर्वात में होकर भी चल सकती हैं। मैक्सवेल ने गणनाओं द्वारा यह निष्कर्ष निकाला कि विद्युत चुंबकीय तरंगों की चाल 3×10^8 मीटर/सेकंड होती है, जो निर्वात में प्रकाश की चाल के बराबर होती है। इसी आधार पर उन्होंने बताया कि प्रकाश विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में चलता है।

एम्पियर मैक्सवेल का परिपथीय नियम (Ampere Maxwell’s Circuital Law)

मैक्सवेल के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र के दो स्रोत होते हैं - (1) संयोजक चालक तार में बहने वाली चालन धारा i_c (2) संधारित्र के दोनों प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन के कारण विस्थापन धारा i_d अतः एम्पियर के परिपथीय नियम के संशोधित रूप से ∮▒〖B ⃗ .dl ⃗=μ_0 i_c+μ_0 i_d 〗 μ_0 (i_c+ i_d ) किन्तु विस्थापन धारा i_d=ϵ_0 (dϕ_E)/dt ∮▒〖B ⃗ .dl ⃗ 〗 = μ_0 (i_c+ ϵ_0 (dϕ_E)/dt) इसे एम्पियर-मैक्सवेल का परिपथीय नियम कहते हैं।

मैक्सवेल की समीकरणें (Maxwell’s Equations)

वैज्ञानिक मैक्सवेल ने विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र विद्युत आवेश तथा विद्युत धारा के पारस्परिक संबंधों को चार समीकरणों द्वारा व्यक्त किया इन समीकरणों को मैक्सवेल की समीकरण कहते हैं।

(1) विद्युत का गौस का नियम (Gauss’s Law of Electricity)

इस नियम के अनुसार, किसी बंद पृष्ठ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स, उसे पृष्ठ द्वारा परिबद्ध कुल आवेश (q) का 1∕ϵ_0 गुना होता है। अर्थात ∮▒〖E ⃗ . dA ⃗=q/ϵ_0 ,समी(1)〗 यह समीकरण मैक्सवेल की प्रथम समीकरण कहलाती है।

(2) चुंबकत्व का गॉस का नियम (Gauss’s Law of Magnetism)

इस नियम के अनुसार, किसी बंद पृष्ठ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स सदैव शुन्य होता है। अर्थात ∮▒〖E ⃗ . dA ⃗=0 ,समी(2)〗

यह मैक्सवेल की द्वितीय समीकरण कहलाती है। यह समीकरण दर्शाती है कि प्रकृति में स्वतंत्र चुंबकीय ध्रुव का कोई अस्तित्व नहीं होता है।

(3) विद्युत चुंबकीय प्रेरण का फैराडे का नियम (Faraday’s Law of Electromagnetic Induction)

इस नियम के अनुसार किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल, परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की ऋणात्मक डर के बराबर होता है अर्थात

e= -((dϕ_B)/dt) ,समी(3)

यह मैक्सवेल की तृतीय समीकरण कहलाती है। यह समीकरण दर्शाती है कि परवर्ती चुंबकीय क्षेत्र, विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं।

(4) एम्पियर मैक्सवेल परिपथीय नियम (Ampere Maxwell Circuital Laws)

इस नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ के लिए चुंबकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन, बंद परिपथ द्वारा परिबद्ध (घिरी) कुल धारा का μ_0 गुना होता है। अर्थात

∮▒〖B ⃗ . dl ⃗=μ_0 (i_c+ i_d ) 〗 i_d=ϵ_0 (dϕ_E)/dt ,समी(4)

यह मैक्सवेल की चौथी समीकरण कहलाती है। यह समीकरण दर्शाती है की परवर्ती विद्युत क्षेत्र, चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।


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